TTN डेस्क
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) के दिवालियापन समाधान मामले में वेदांता लिमिटेड की उस याचिका पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें अदानी एंटरप्राइजेज की समाधान योजना पर रोक लगाने की मांग की गई थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने स्पष्ट किया कि चूंकि नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) पहले से ही इस मामले की सुनवाई कर रहा है, इसलिए वे फिलहाल कोई आदेश पारित नहीं करेंगे।
0 वेदांता का तर्क: हमारी बोली 3,000 करोड़ रुपये अधिक
वेदांता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने दलील दी कि उनके मुवक्किल ने ₹17,926.21 करोड़ का प्रस्ताव दिया था, जबकि अदानी एंटरप्राइजेज की बोली लगभग ₹14,000 करोड़ (करीब ₹15,000 करोड़ संशोधित) थी। सिबल ने तर्क दिया कि उनकी बोली शुद्ध वर्तमान मूल्य और कुल प्रतिफल, दोनों ही दृष्टि से सबसे अधिक थी। उन्होंने सवाल उठाया कि लेनदारों की समिति (CoC) ₹3,000 करोड़ कम मिलने के बावजूद जयप्रकाश एसोसिएट्स को अदानी को सौंपने को तैयार है, जो ‘मूल्य अधिकतमकरण’ के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
0 सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: नीतिगत फैसलों के लिए लेनी होगी अनुमति
हालांकि न्यायालय ने अंतरिम रोक लगाने से मना कर दिया, लेकिन वेदांता को बड़ी राहत देते हुए यह आदेश दिया कि यदि इस दौरान निगरानी समिति को कोई बड़ा ‘नीतिगत निर्णय’ लेना है, तो उसे पहले NCLAT की अनुमति लेनी होगी। कोर्ट ने NCLAT से अनुरोध किया है कि वह इस मामले की सुनवाई तय तारीख यानी 10 अप्रैल को ही करे और यदि बहस पूरी न हो तो अगले कार्यदिवस पर इसे जारी रखे।
0 अदानी और CoC का पक्ष: भुगतान की शर्तें हैं बेहतर
अदानी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और आरपी (RP) की ओर से डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि वेदांता ने यह प्रस्ताव तब दिया था जब प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी थी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने लेनदारों की समिति (CoC) की ओर से बताया कि दोनों बोलियों में मुख्य अंतर अग्रिम भुगतान की शर्तों का था और समाधान योजना को लागू करने में अभी समय लगेगा, जिससे किसी के हितों को तत्काल नुकसान नहीं होगा।
0 क्या है पूरा मामला?

सीमेंट और निर्माण क्षेत्र की दिग्गज कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड को जून 2024 में आईसीआईसीआई बैंक की याचिका पर दिवालिया घोषित किया गया था। समाधान प्रक्रिया के दौरान, अदानी एंटरप्राइजेज की योजना को 93.81% लेनदारों का समर्थन मिला, जिसे 17 मार्च 2026 को न्यायाधिकरण ने मंजूरी दे दी। वेदांता ने इस मंजूरी को इस आधार पर चुनौती दी है कि उसकी ऊंची बोली को गलत तरीके से नजरअंदाज किया गया। अब सबकी निगाहें 10 अप्रैल को NCLAT में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं।


