जाननी जरूरी है गुलशन की ये कहानी : दोनों हाथ नहीं फिर भी बने शिक्षक, लव स्टोरी भी है गजब

//मनोज यू.शर्मा//

00 जन्म से दोनों हाथ न होने के बावजूद, झारखंड के गुलशन लोहार ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और परिवार के समर्थन से हाई स्कूल के छात्रों को पैरों से ब्लैकबोर्ड पर लिखकर गणित पढ़ाने का अनोखा मुकाम हासिल किया। उनकी कहानी साहस, समर्पण और शिक्षा के प्रति जुनून की मिसाल है, जिसमें उनकी मां ,छोटे भाई और अब पत्नी का योगदान भी है महत्वपूर्ण ।

TTN डेस्क

गुलशन लोहार का जन्म झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले के बरांगा गांव में हुआ। जन्म से दोनों हाथ न होने के कारण उन्हें बचपन से शारीरिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उनकी मां, मालती लोहार, ने उनकी इस कमी को कभी कमजोरी नहीं बनने दिया। मालती ने गुलशन को पैरों से पेंसिल पकड़ना सिखाया, जिससे उनका आत्मविश्वास जागा और आत्मनिर्भरता की नींव पड़ी। मां की प्रेरणा ने गुलशन को पढ़ाई और जीवन में आगे बढ़ने की हिम्मत दी।

0 भाई हो तो ऐसा

गुलशन के छोटे भाई, रमेश लोहार, ने भी उनके जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रमेश ने बचपन में गुलशन की पढ़ाई और दैनिक कार्यों में मदद की, जैसे स्कूल के लिए सामान तैयार करना और उनकी 74 किलोमीटर की दैनिक यात्रा में सहायता करना। रमेश का समर्थन गुलशन के लिए भावनात्मक और व्यावहारिक दोनों रूप से महत्वपूर्ण रहा, जिसने उन्हें शिक्षा के प्रति अपने जुनून को बनाए रखने में मदद की।

0 शिक्षा के लिए रोज 74 किलोमीटर सफर

74 किलोमीटर की दैनिक यात्रा
गुलशन ने रोजाना 74 किलोमीटर की यात्रा करके स्कूल पहुंचकर अपनी पढ़ाई पूरी की। उनकी मां और छोटे भाई के सहयोग ने इस कठिन सफर को संभव बनाया। पैरों से लिखने की कला को निखारते हुए, उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की और शिक्षक बनने का सपना देखा।
शिक्षक बनने का सपना
गुलशन ने अपनी मेहनत से शिक्षक बनने का रास्ता बनाया और वर्तमान में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की तैयारी कर रहे हैं, ताकि स्थायी शिक्षक बन सकें।

0 शिक्षण में अनोखा तरीका

पैरों से ब्लैकबोर्ड पर लेखन
पिछले 11 वर्षों से गुलशन पैरों से ब्लैकबोर्ड पर लिखकर हाई स्कूल के छात्रों को गणित पढ़ा रहे हैं। उनकी यह अनोखी शैली छात्रों के लिए प्रेरणादायक है और उनकी पढ़ाने की प्रभावी शैली ने कई छात्रों को अच्छे परिणाम दिलाए हैं।

0 क्या कहते है छात्र

दसवीं कक्षा की छात्रा नेहा महतो ने बताया कि गुलशन सर की पढ़ाने की शैली से जटिल गणितीय अवधारणाएं समझना आसान हो जाता है। उनके इस समर्पण ने छात्रों में आत्मविश्वास जगाया है।

0 गजब है गुलशन और अंजलि की प्रेम कहानी

गुलशन की मुलाकात उनकी पत्नी अंजलि सोय से तब हुई, जब वे हाई स्कूल में पढ़ा रहे थे। अंजलि, जो उनकी छात्रा थीं, उनके पढ़ाने के तरीके और प्रेरणादायक व्यक्तित्व से प्रभावित हुईं। धीरे-धीरे दोनों के बीच प्रेम पनपा, जो 2017 में लव मैरिज में बदला। अंजलि ने गुलशन की शारीरिक अक्षमता को कभी बाधा नहीं माना और उनके सपनों का सहारा बनीं।
एक-दूसरे का सहारा
विवाह के बाद, अंजलि ने गुलशन की आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों में उनका साथ दिया। गुलशन भी अंजलि को टीईटी की तैयारी करवाकर उनके शिक्षक बनने के सपने को समर्थन दे रहे हैं। उनका रिश्ता प्रेम और साझा लक्ष्यों पर आधारित है।

0 जारी है आर्थिक और सामाजिक चुनौतियां

मानदेय और अस्थायी नौकरी
गुलशन को प्रति घंटे 139 रुपये के हिसाब से 13,000-14,000 रुपये मासिक आय होती है, लेकिन अस्थायी नौकरी के कारण छुट्टियों में उनकी आय कम हो जाती है। अंजलि और उनके परिवार का समर्थन इस आर्थिक चुनौती को सहने में मदद करता है।
गुलशन ने अपनी अक्षमता को ताकत बनाया, लेकिन समाज में पूरी स्वीकृति के लिए अभी भी संघर्ष है। उनकी मां, भाई और पत्नी की प्रेरणा ने उन्हें सामाजिक बाधाओं को पार करने में मदद की।

0 अपनी कमियों को न बनाए बहाना

गुलशन की कहानी, जिसमें उनकी मां मालती, छोटे भाई रमेश, और पत्नी अंजलि का योगदान शामिल है, उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो अपनी कमियों को बहाना बनाते हैं। परिवार के सहयोग ने उन्हें आत्मनिर्भर और प्रेरणादायक बनाया।

0 स्थायी शिक्षक बनने के लिए जारी संघर्ष

गुलशन का लक्ष्य टीईटी पास करके स्थायी शिक्षक बनना है, ताकि वे और अधिक बच्चों को शिक्षित कर सकें और अपनी आर्थिक स्थिति सुधार सकें।

0इनके बिना अधूरी है गुलशन की कहानी

गुलशन लोहार की कहानी उनकी मां मालती, छोटे भाई रमेश, और पत्नी अंजलि के योगदान के बिना अधूरी है। मां ने आत्मविश्वास जगाया, भाई ने बचपन में सहारा दिया, और अंजलि ने जीवनसाथी के रूप में हर कदम पर साथ निभाया। पैरों से गणित पढ़ाने वाले गुलशन न केवल अपने छात्रों, बल्कि पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा हैं।

स्रोत : बीबीसी