कोरबा : पैगंबर हज़रत मुहम्मद के 1500वें जन्मोत्सव पर निकला भव्य जुलूस-ए-मोहम्मदी

00 जुलूस में दिखा युवाओं और बच्चों का जोश, सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस का मिला भरपूर सहयोग

TTN Desk

कोरबा, छत्तीसगढ़: पैगंबर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के 1500वें जन्मोत्सव, जश्ने ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर, कोरबा में एक विशाल और भव्य जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया। मरकज़ी सीरत कमेटी के तत्वावधान में आयोजित इस जुलूस में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया, जिसमें हर आयु वर्ग के लोग शामिल थे।

0 पूरे शहर में गूंजी अमन और मोहब्बत की गूंज

जुलूस की शुरुआत सुबह 9 बजे बुधवारी स्थित नूरी मस्जिद से हुई। यह जुलूस एसईसीएल कॉलोनी होते हुए मुड़ापार पहुंचा और फिर ट्रांसपोर्ट नगर स्थित मदरसा गौसिया पहुंचा, जहाँ परचम की रस्म अदा की गई। इसके बाद, जुलूस विशाल रूप लेकर शहर के मुख्य मार्गों से गुजरा, जिसमें पावर हाउस रोड और पुराना बस स्टैंड कोरबा शामिल थे। इस दौरान जगह-जगह लंगर, शरबत, बिस्किट और चाय नाश्ते का इंतज़ाम किया गया था, जहाँ छोटे बच्चों और युवाओं का जोश देखते ही बन रहा था। जुलूस का समापन पुरानी बस्ती स्थित मदीना मस्जिद में हुआ, जहाँ परचम कुशाई की रस्म अदा की गई।

0 किछौछा शरीफ़ से मौलाना हसन अशरफ़ की गरिमामय उपस्थिति

इस भव्य आयोजन में उत्तर प्रदेश के किछौछा शरीफ से हज़रत अल्लामा मौलाना हसन अशरफ़ साहब की गरिमामय उपस्थिति रही। उन्होंने पूरे जुलूस के दौरान अपनी मौजूदगी दर्ज कराई और अंत में मदीना मस्जिद में परचम कुशाई की रस्म अदा की। इसके बाद उन्होंने जुमे की नमाज से पहले लोगों को संबोधित किया, जिसके बाद नमाज़ अदा की गई। नमाज़ के बाद पैगंबर मुहम्मद साहब के बाल मुबारक के दर्शन भी कराए गए, जिससे पूरा कार्यक्रम श्रद्धा और सम्मान के साथ संपन्न हुआ।

0 कमेटी ने जताया सभी का आभार

मरकज़ी सीरत कमेटी के अध्यक्ष, मोहम्मद आसिफ़ बेग (निशु) और मोहम्मद मोहसिन मेमन ने जुलूस में शामिल हुए सभी लोगों का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने जुलूस के सफल आयोजन के लिए निगम प्रशासन, पुलिस प्रशासन और शासन-प्रशासन का भी आभार व्यक्त किया। साथ ही, जुलूस को अनुशासित और व्यवस्थित ढंग से निकालने के लिए कमेटी के वॉलंटियर्स की भी सराहना की गई। यह जुलूस, मरकज़ी सीरत कमेटी के सरपरस्तों जनाब मोहम्मद रफीक मेमन, मो. आरिफ़ ख़ान, महबूब ख़ान, मकबूल ख़ान, जावेद रब्बानी, नौशाद ख़ान, फ़ारूक़ मेमन और शहर की सभी मस्जिदों के इमामों व उलेमा-ए-इकराम की देखरेख में निकाला गया था।