तिरुपति लड्डू विवाद: नया मोड़… जानिए CBI ने क्यों किया सुप्रीम कोर्ट का रुख?

TTN डेस्क


केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के एक आदेश के खिलाफ भारत के सुप्रीम कोर्ट(SC )का दरवाजा खटखटाया है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि CBI ने “मिलावटी घी” के मामले की जांच में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन किया है, जिसका इस्तेमाल तिरुपति लड्डू प्रसाद बनाने के लिए किया जाता था।

0 सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी. आर. गवई और जस्टिस चंद्रन की पीठ के समक्ष पेश होकर इस मामले को गुरुवार या शुक्रवार को सुनने का अनुरोध किया। मेहता ने कहा, “कुछ भ्रम है, कृपया इसे इस सप्ताह के अंत में लें।” CJI गवई ने मामले को 26 सितंबर, शुक्रवार को सुनने पर सहमति जताई।

0 क्या है हाईकोर्ट का फैसला?

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि CBI निदेशक ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के विपरीत काम किया। उन्होंने एक ऐसे अधिकारी जे. वेंकट राव को जांच करने की अनुमति दी जो विशेष जांच दल (SIT) का औपचारिक हिस्सा नहीं थे। हाईकोर्ट ने कहा कि वेंकट राव को SIT में राज्य के प्रतिनिधि के रूप में नामित नहीं किया गया था, इसलिए वह इस मामले में जांच की शक्तियां नहीं ले सकते थे।

0 सुप्रीम कोर्ट का पिछला आदेश

पिछले साल अक्टूबर में, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा नियुक्त SIT को बदलने का आदेश दिया था। जस्टिस बी. आर. गवई और के. वी. विश्वनाथन की खंडपीठ ने आदेश दिया था कि नई SIT में CBI निदेशक द्वारा नामित अधिकारी, आंध्र प्रदेश राज्य पुलिस के दो अधिकारी और FSSAI के अध्यक्ष द्वारा नामित एक वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।
30 सितंबर, 2024 को, शीर्ष अदालत ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू द्वारा SIT की रिपोर्ट आने से पहले ही प्रेस में दिए गए बयानों पर नाराजगी भी व्यक्त की थी। कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से यह भी पूछा था कि क्या राज्य द्वारा नियुक्त SIT को जांच जारी रखनी चाहिए या इसे किसी स्वतंत्र प्राधिकरण द्वारा किया जाना चाहिए।

0 विवाद की जड़

यह विवाद तब शुरू हुआ जब तिरुपति प्रसाद में इस्तेमाल होने वाले घी में मिलावट का आरोप लगा। सुदर्शन न्यूज के प्रधान संपादक सुरेश चव्हाणके सहित कई लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं। इन याचिकाओं में आपराधिक साजिश और तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) ट्रस्ट के कुप्रबंधन की जांच की मांग की गई थी।
एक अध्ययन से पता चला कि पिछले TTD ट्रस्ट के कार्यकाल के दौरान लड्डू बनाने में मांसाहारी उत्पाद जैसे पशुओं की चर्बी, ‘लार्ड’ (सुअर की चर्बी), मछली का तेल, और अन्य अशुद्धियाँ इस्तेमाल की जा रही थीं। यह न केवल मंदिर से जुड़ी धार्मिक परंपराओं का उल्लंघन है, बल्कि हिंदू धार्मिक भावनाओं और “सनातन धर्म” का भी अपमान है। हिंदू धर्म में मंदिर के अनुष्ठानों और भगवान को अर्पित की जाने वाली किसी भी वस्तु में मांसाहारी चीजों का उपयोग सख्त रूप से वर्जित है।